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देवनागरी के कुछ अक्षरों के बारे में

17 July, 2011

कुछ समय पहले मेरे एक दोस्त ने देवनागरी के कुछ अक्षरों के बारे में ये सवाल पूछे। वो सवाल और मेरे जवाब इस लेख का विषय हैं।

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Hi,

I have some questions about the Hindi/Devanagari letters अः ऋ ङ ञ ष क्ष त्र ज्ञ

1. Some of these characters are not/never used in Hindi. Are they more common in other Indian languages/scripts?

2. I assume these have come from Sanskrit but I am not sure what their correct pronunciation is. Since ‘correct’ is a very subjective term, let’s ask what their original or old/older/oldest known pronunciation is?

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 ये बात सही नहीं है की “Some of the characters are not/never used in Hindi.” ये सारे ही हिंदी में इस्तेमाल किये जाते हैं। सवाल शायद ये है कि ये क्यों इस्तेमाल किये जाते हैं। 

एक एक कर के बात करते हैं …
अः 
विसर्ग (अः) का इस्तेमाल सभी भाषाओं में सिर्फ़ तत्सम शब्दों में होता है। (तत्सम – वो शब्द जो संस्कृत से बिना किसी परिवर्तन के लिये गए हैं।)
इसका  इस्तेमाल सिर्फ़ मात्रा के रूप में होता है। जैसे दुःख, क्रमशः, पुनः वग़ैरा। उच्चारण ह् की तरह होता है। सवाल ये है की जब ह् मौजूद है तो अः किस काम का है। वो इसलिए कि जबकि स्वतन्त्र रूप में विसर्ग और ह् एक जैसे उच्चारित होते हैं, संस्कृत में संधि करते हुए विसर्ग का रूप बदलता रहता है, इसलिए इसको ह् से अलग दिखाने के लिए अलग चिह्न (‍ः) बनाया गया है –
कः + अपि = कोsपि
दुः + यः + धन = दुर्योधन 
दुः + शासन = दुश्शासन
दूसरे शब्दों में, इसका ह् से भेद ध्वन्यात्मक नहीं, वैयाकरणिक है।  

 
इसका इस्तेमाल भी तत्सम शब्दों में ही होता है, जैसे ऋषि, कृपा इत्यादि। इसकी गिनती स्वरों में की जाती है हालाँकि इसका आधुनिक उच्चारण एक व्यंजन+स्वर संयोजन की तरह होता है – 
उत्तर भारत : रि/री
दक्षिण भारत + महाराष्ट्र + गुजरात : रु/रू 
लेकिन पुराने ज़माने में ये वाकई एक स्वर था, और इसका उच्चारण इस तरह होता होगा कि जीभ को ’र’ बोलने की अवस्था में रखें लेकिन ’अ’ बोलने की कोशिश करें। इसका उदाहरण अमरीकी शैली की अंग्रेज़ी में curb शब्द में क और ब के बीच के ’r’ में मिलता है। 
curb (अमरीकी उच्चरण) को संस्कृत में इस तरह लिखा जाता (अगर लिखने वाला २०००-३००० साल पहले का होता) ‘ कृब् ‘।
उच्चारण समय के साथ बदलना हर भाषा में स्वाभाविक है लेकिन शास्त्रीय नियम (कि ऋ स्वर है) और वर्तनी (spelling) कम परिवर्तनशील होते हैं।

ङ और 
हिंदी की वर्णमाला के क से म तक के २५ अक्षर एक periodic table में व्यवस्थित हैं। अगर कोई अक्षर बहुत कम या कभी नहीं इस्तेमाल होता है, तो भी उसकी जगह ख़ाली नहीं छोड़ी जाती। इन दोनों अक्षरों का इस्तेमाल स्वायत्त रूप में नहीं होता लेकिन कुछ शब्दों में अप्रत्यक्ष होता है, जैसे – 
गंगा = गङ्गा

चंचल = चञ्चल

उसी तरह, जिस तरह संबंध = सम्बन्ध 
ङ – क, ख, ग, घ के अनुरूप नासिक्य ध्वनि है, और ञ – च, छ, ज, झ के अनुरूप। उसी तरह जिस तरह म – प, फ, ब, भ के।


इसका श के साथ भेद मुख्य रूप से सैद्धान्तिक है। सुनने में ज़्यादा अलग नहीं लगता, लेकिन उच्चरण-स्थान अलग हैं। श (और च छ ज झ ञ) तालु से (palate – roof of the mouth)। ष (और ट ठ ड ढ ण) मूर्धा से (alveolar ridge – the raised part just behind the teeth). इसीलिये चवर्ग के साथ हमेशा श आता है और टवर्ग के साथ हमेशा ष। जैसे – 
निश्चय, पश्चात, आश्चर्य 
निष्ठुर, कष्ट 

क्ष त्र और ज्ञ
ये संयुक्ताक्षर हैं।
क्ष = क् + ष 
त्र = त् + र
ज्ञ = ज् + ञ
देवनागरी और भारत की बाकी आधुनिक लिपियाँ (उर्दू के अलावा) ब्राह्मी से अवतरित हुई हैं। और ब्राह्मी में संयुक्ताक्षर लिखने का तरीका ये था की पहले व्यंजन को ऊपर लिखा जाता था और दूसरे को उससे लगा के उसके नीचे। लेकिन समय के साथ साथ अक्षरों की बनावट बदलती गयी। (इसलिए आज इतनी सारी लिपियाँ हैं।) देवनगरी में कुछ संयुक्ताक्षरों का स्वरुप इस तरह से बदला की उसके संघटक व्यंजनों को अब पहचाना नहीं जा सकता, जैसा की इन तीनों (क्ष त्र और ज्ञ) में हुआ है। इसकी सम्भावना काफ़ी कम है की सभी लिपियों में इन्ही तीनों का यही हाल हुआ होगा। इसलिए, उदहारण की लिए तेलुगु में इन तीनों की बनावट स्पष्ट है – 

(क्ष) క్ష = క + ష 
(त्र) త్ర = త + ర 
(ज्ञ) జ్ఞ = జ + ఞ

तेलुगु लिपि में ये तीन अपवाद नहीं हैं जैसे कि देवनागरी में हैं।

ज्ञ के बारे में थोड़ी और जानकारी। हिंदी में इसका आधुनिक अच्चारण ‘ग्य’ है और दक्षिण भारतीय भाषाओँ में ’ग्न्य’ है। समय के साथ उच्चारण बदलता रहता है। पुराने ज़माने में, जब लोगों ने लिखना शुरू किया होगा तब सचमुच ’ज्‍ञ’ उच्चारण करते होंगे। लेकिन उच्चारण इसके पहले भी बदलता रहा था। और पहले ‘ग्न’ की तरह बोलते होंगे। इसकी प्रतिध्वनि अंग्रेजी के know, agnostic इत्यादि शब्दों की वर्तनी में मिलती है।

Devanagari

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