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हिन्दी में क्रियापद का लिंग

17 May, 2012

हिन्दी में क्रियापद का लिंग

ये वाक्य देखें –

महेश जाता है। वर्तमान काल, अकर्मक
महेश गया। भूत काल, अकर्मक
महेश चावल खाता है। वर्तमान काल, सकर्मक
महेश रोटी खाता है। वर्तमान काल, सकर्मक
महेश ने चावल खाया। भूत काल, सकर्मक
महेश ने रोटी खाई। भूत काल, सकर्मक

ऊपर के सभी वाक्यों में कर्ता (महेश) पुल्लिंग है। वाक्य ६ के अलावा सभी वाक्यों में क्रियापद भी पुल्लिंग है (जाता है/गया/खाता है/खाया)। वाक्य ६ में क्रियापद स्त्रीलिंग है (खाई)।

अब ये वाक्य देखें जिनमें कर्ता स्त्रीलिंग है।

सुधा जाती है। वर्तमान काल, अकर्मक
सुधा गई। भूत काल, अकर्मक
सुधा चावल खाती है। वर्तमान काल, सकर्मक
१० सुधा रोटी खाती है। वर्तमान काल, सकर्मक
११ सुधा ने चावल खाया। भूत काल, सकर्मक
१२ सुधा ने रोटी खाई। भूत काल, सकर्मक

इन वाक्यों में भी क्रियापद कर्ता के अनुरूप स्त्रीलिंग है, केवल वाक्य ११ को छोड़ कर। ध्यान से देखें तो दोनों अपवाद वाक्यों में क्रियापद के लिंग की कर्ता से नहीं बल्कि कर्म से समरूपता है।

६ महेश ने रोटी खाई। (कर्म = रोटी, स्त्रीलिंग)

११ सुधा ने चावल खाया। (कर्म = चावल, पुल्लिंग)

संक्षेप में ये कहा जा सकता है कि हिन्दी में वर्तमान काल में अकर्मक और सकर्मक क्रियापदों का लिंग कर्ता से निर्धारित होता है। लेकिन भूतकाल में अकर्मक क्रियापद का लिंग कर्ता से और सकर्मक क्रियापद का कर्म से निर्धारित होता है।

ये तो वर्णन हुआ नियम का। नियम की उत्पत्ति के लिये संस्कृत वाक्यों को देखें –

महेशः गच्छति। वर्तमान काल, अकर्मक
महेशः अगच्छत्। भूत काल, अकर्मक
महेशः ओदनं खादति। वर्तमान काल, सकर्मक
महेशः रोटिकां खादति। वर्तमान काल, सकर्मक
महेशः ओदनम् अखादत्। भूत काल, सकर्मक
महेशः रोटिकाम् अखादत्। भूत काल, सकर्मक
सुधा गच्छति। वर्तमान काल, अकर्मक
सुधा अगच्छत्। भूत काल, अकर्मक
सुधा ओदनं खादति। वर्तमान काल, सकर्मक
१० सुधा रोटिकां खादति। वर्तमान काल, सकर्मक
११ सुधा ओदनम् अखादत्। भूत काल, सकर्मक
१२ सुधा रोटिकाम् अखादत्। भूत काल, सकर्मक

संस्कृत में क्रियापद लिंगरहित होता है इसलिये कर्ता चाहे पुल्लिंग हो या स्त्रीलिंग, क्रियापद एक सा होता है। लेकिन संस्कृत में भूतकालिक वाक्यों का एक और स्वरूप प्रचलित है जिसमें लङ्लकार की जगह ’क्‍त’ प्रत्यय से भूतकाल का भाव प्रकट किया जाता है। इस स्वरूप के भूतकालिक वाक्यों के उदाहरण देखें –

महेशः गतः। भूत काल, अकर्मक
महेशेन ओदनं खादितम्। भूत काल, सकर्मक
महेशेन रोटिका खादिता। भूत काल, सकर्मक
सुधा गता। भूत काल, अकर्मक
११ सुधया ओदनं खादितम्। भूत काल, सकर्मक
१२ सुधया रोटिका खादिता। भूत काल, सकर्मक

यहाँ अकर्मक वाक्य कर्तृवाच्य में है, जबकि सकर्मक वाक्य कर्मवाच्य में है। इससे अकर्मक वाक्यों में क्रिया कर्ता से निर्धारित ह्आ है और सकर्मक वाक्यों में कर्म से। शायद हिन्दी में भूतकालिक वाक्य की उत्पत्ति संस्कृत के ’क्‍त’ प्रत्यय वाले स्वरूप से हुई है, जिससे अकर्मक और सकर्मक क्रियापदों के लिंग-निर्धारण में विषमता आई है।